Wednesday, August 27, 2008

सिर के रोगों से बचने के लिये

नहाने से पहले पाँच मिनिट तक मस्तष्क के मध्य तालुवे पर किसी श्रेष्ठ तेल (नारियल, सरसों, तिल्ली, ब्राह्मी-आवलाँ,भृंगराज) की मालिश किजिए। इससे स्मरण शक्ति और बुध्दि का विकास होगा और बाल काले चमकीले और मुलायम होगें।
विशेष - रात को सोने से पहले कान के पीछे की नाड़ियाँ, गर्दन के पीछे की नाड़ियाँ और सिर के पिछले भाग पर तेल की नर्मी से मालिश करने से चिंता, तनाव और मानसिक परेशानी के कारण उत्पन्न होने वाला सिर के पिछले भाग और गर्दन में दर्द तथा भारीपन मिटता है ।

केशों की श्यामलता बनाये रखने के लिये

शीर्षासन अथवा सर्वांगासन ठीक ढंग से करते रहने से बालों की जड़े मजबूत होती है। बालों का झड़ना बन्द हो जाता है और बाल जल्दी सफेद नहीं होते। बाल काले चमकीले और सुन्दर बन जाते हैं।
विशेष - युवावस्था सेअही दोनों समय भोजने करने के पश्चात वज्रासन में बैठकर दो से तीन मिनिट तक लकड़ी या सींग या हाथी की दांत की कंघी करने से बाल सफेद नहीं होते तथा वात पित और मस्तिष्क की पीड़ा से सम्बन्धित रोग नहीं होते। सिर दर्द दूर होके मस्तिष्क बलवान बनता है। बालों के जल्दी पकने के अलावा बालों का जल्दी गिरना भी बन्द हो जाता है

पानी अनेक रोगों की एक दवा-जल चिकित्सा पध्दति

सायंकाल ताम्बे के एक बर्तन में पानी भरकर रख लें। प्रात: सूर्योदय से पहले उस बासी पानी को पीयें तथा सौ कदम टहल कर शौच जायें। इससे कब्ज दूर होकर शौच खुलकर आयेगी। इससे मलशुध्दि के साथ बवासीर, उदय रोग, यकृत-प्लीहा के रोग, मूत्र और वीर्य सम्बन्धी रोग, सिर दर्द,नेत्रविकार तथा वात पित्त और कफ से होने वाले अनेकानेक रोगों से मुक्त रहता है। बुढ़ापा उसके पास नहीं फटकता और वह शतायु रहता है

Tuesday, August 26, 2008

फेफड़ों की सूजन

इस बिमारी में तुलसी के ताजा पत्तों का रस बढाते हुए प्रात: सायं खाली पेट पीने से लाभ मिलता है ।
परहेज - मिर्च मसालेदार एवं कफकारक आहार न लें बल्कि हल्का सुपाच्य आहार लें ।

गैस टृबल

काली हरड़ को पानी से धोकर किसी साफ कपड़े से पौंछ कर रख लें। दोनो समय भोजन के पश्चात एक हरड़ को मुहँ में रखकर चूस लिया करें। लगभग एक घंटे में हरड़ में घुल जाती है। यह गैस और कब्ज के लिये सर्वश्रेष्ठ दवा है ।
विशेष - इससे गैस की शिकायत दूर होती है शौच खुलकर आती है भूख खूब लगने लगती है।पाचन शक्ति बढती है। जिगर के रोग और अंतडिओं की वायु नष्ट होती है रक्त शुध्द होता है । चर्म रोग नहीं होता है । सिरगेट- बीड़ी का अभ्यास छूट जाता है ।

कायाकल्प के समान नवजीवन प्रदाता योग

हरे आँवला को कुचलकर उसका रस निकाल लें। तत्पश्चात 15ग्राम हरे आँवला के रस में 15ग्राम शहद मिलाकर प्रात: व्यायाम के बाद पी लें। आँवलों के मौसम में निरंतर डेढ़- दो मास लेंते रहने से काया पलट हो जाती है और इससे सभी रोगों से बचे रहते है।

विशेष - इसके सेवन से वीर्य विकार नष्ट होते हैं। प्रमेह और मूत्र गड़्बड़ी ठीक हो जाती है पेशाब में धातु जाने का रोग अच्छा होता है । वीर्य पुष्टि और वीर्य विकार नष्ट होते हैं । इससे आमाशय को बल मिलता है और शरीर में नए रक्त का निर्माण होता है । सेवन काल में ब्रह्मचर्य पालन करें।